मैं अकेला नहीं हूं
कहते हैं कि जेब से खाली इंसान पर सबसे पहली और सबसे ज़्यादा मार अपने घर से ही पड़ती है। अगर आपके पास काम नहीं है और आप बेरोज़गार हैं तो आप पर सबसे पहला और तीख़ा वार आपके मां-बाप और भाई-बहन ही करते हैं। इस कहानी में लेखक ने ऐसे ही बेरोज़गार और काम की तलाश में भटकते एक नौजवान की रुदाद बयान की है। कहानी का प्रमुख चरित्र फिलिस्तीन के हाइफ़ा शहर में रहता है, जहां वह शुरू में एक छोटी-मोटी नौकरी करता है। मगर राजनीतिक और साथियों की तिकड़मबाज़ियों की वजह से उसकी वह नौकरी भी चली जाती है। इसके बाद काम की तलाश में वह कैसी-कैसी मुसीबतों, तकलीफ़ों और अत्याचारों से दो-चार होते हुए किस तरह अपनी ज़िंदगी के लिए एक सार्थक पहल पर पहुंचता है, उसकी इसी जद्दोजहद ने कहानी को बेहद दिलचस्प बना दिया है।
November 19, 2023