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#अफ़्रीका

काली त्वचा, कौनसा नक़ाब

काली त्वचा, कौनसा नक़ाब

इस कहानी में मारेचेरा ऑक्सफ़र्ड में रह रहे दो अश्वेत अफ़्रीकी युवकों की दोस्ती, दूरी और टूटन के ज़रिये नस्ल, शर्म, आत्म-घृणा और पहचान की बेचैनी को खोलते हैं। एक युवक अपनी देह, भाषा, कपड़ों और चाल-ढाल से ख़ुद को स्वीकार्य बनाने की कोशिश में लगा है; दूसरा उसे देखता है—तंज़, करुणा और क्रूर ईमानदारी के साथ। कहानी बाहर से हास्य और कटाक्ष से भरी है, लेकिन भीतर एक गहरा अँधेरा है: वह अँधेरा जिसमें आदमी अपने रंग, अपनी आवाज़ और अपनी ही मौजूदगी से लड़ने लगता है।

डाम्बुद्ज़ो मारेचेरा